Thursday, 22 September 2011

Once Upon A Time in Thomso


Once Upon a Time in Thomso….

था Thomso का Occasion, हर तरफ हुस्न का ज़लजला
हर कोई लगा था flirting मे, मैं रहता क्यों चुपचाप भला !

थी नई जींस ले नया जोश बालो मे कंघी मार चला
इस छेड़छाड़ की बेला मे, मैं भी होकर तैयार चला

पहुंचा हाईड पार्क तो बैठी दिखी दूर इक चंचला
बैठे उसको देख अकेला मन मे आशा का दीप जला

दिल ये बोला, संत निशीथ अब चल कर उस पर मारो फाइट
कोई ना जाने कब जल जाये किस्मत की ये ट्युब लाइट

जाकर बोला, excuse me I am an IIT student,
if no one is with you here can use me as a supplement.

I would like enjoy thomso, आपको अपने संग लेकर
नज़र मिलाई, वो मुस्काई, बोली It will be my pleasure.

खुश था बहुत मैं लड़की मिल गई चलो मुझे भी अब तो यार
as obvious  लेकर पहुचा पहले उसको अल्पाहार

जाकर मैने ऑर्डर मारा आइटम एक सस्ता वाला
हाय! उसने तो सारा का सारा मेनु ही मंगा डाला
खैर
निपटे ही थे खा पीकर कि होर्न् बजाती आई एक कार
बोली लगता है डैडी आ गये I have to leave now sorry yaar

बात सुनी उसके जाने की ठंडा पड़ गया सारा जोश
पर जब उसके डैडी को देखा रहे सहे भी उड़ गये होश

काल चक्र की बुरी निगाहे मेरी कुंडली पर बैठी थी
भाई मेरी जिससे आंख लड़ी वो प्रोफेसर की बेटी थी

डाँट के बोले you stupid flirting with my daughter
I will see you tommorow just meet me in my chamber

काँप उठा मै दिल ये चाहा, हाय ज़मी ये फट जाये
खैर मनाओ संत निशीथ कही year repeat न लग जाये

डाँट डाँट कर प्रोफेसर जी दे रहे थे मुझको warning
बात सम्भाली उसने बोली, डैडी! भैय्या is so helping.

जाते जाते कह गयी भैय्या टाइम मिले तो घर आना
राखी तो अब बीत चुकी तुम भाईदोज पर आ जाना

माथा ठोंका लगा खींचने गुस्से से अपने ही बाल
बहुत हंसे सब देखने वाले बोले एक और हुआ हलाल!

Saturday, 17 September 2011

Papa ke Dil Se



पापा के दिल से............

माँ को गले लगाते हो, कुछ पल मेरे भी पास रहो !
पापा याद बहुत आते हो कुछ ऐसा भी मुझे कहो !
मैनेँ भी मन मे जज़्बातोँ के तूफान समेटे हैँ,
ज़ाहिर नही किया सोचो पापा के दिल मेँ प्यार हो!

थी मेरी ये ज़िम्मेदारी घर मे कोई मायूस हो
मैँ सारी तकलीफेँ झेलूँ और तुम सब महफूज़ रहो,
सारी खुशियाँ तुम्हेँ दे सकूँ इस कोशिश मे लगा रहा,
मेरे बचपन मेँ थी जो कमियाँ वो तुमको महसूस हो!

हैँ समाज का नियम भी ऐसा पिता सदा गम्भीर रहे,
मन मे भाव छुपे हो लाखोँ, आँखो से नीर बहे!
करे बात भी रुखी-सूखी, बोले बस बोल हिदायत के,
दिल मे प्यार है माँ जैसा ही, किंतु अलग तस्वीर रहे!

भूली नही मुझे हैँ अब तक तुतलाती मीठी बोली,
पल-पल बढते हर पल मे जो यादोँ की मिश्री घोली,
कन्धोँ पे वो बैठ के जलता रावण देख के खुश होना,
होली और दीवाली पर तुम बच्चोँ की अल्हड टोली!

माँ से हाथ-खर्च मांगना, मुझको देख सहम जाना,
और जो डाँटू ज़रा कभी तो भाव नयन मे थम जाना,
बढते कदम लडकपन को कुछ मेरे मन की आशंका,
पर विश्वास तुम्हारा देख मन का दूर वहम जाना!

कॉलेज के अंतिम उत्सव मेँ मेरा शामिल हो पाना,
ट्रॅन हुई आँखो से ओझल, पर हाथ देर तक फहराना,
दूर गये तुम अब तो इन यादोँ से दिल बहलाता हूँ,
तारीखेँ ही देखता हूँ बस कब होगा अब घर आना!

अब के जब तुम घर आओगे, प्यार मेरा दिखलाऊंगा,
माँ की तरह ही ममतामयी हूँ तुमको ये बतलाऊंगा,
आकर फिर तुम चले गये बस बात वही दो-चार हुई,
पिता का पद कुछ ऐसा ही हैँ फिर खुद को समझाऊंगा!